सुख के सब साथी दुख मे न कोई

सुख के सब साथी दुख मे न कोई

तीन साल पहले आर्थिक-स्थिति से पूरी तरह से संपन्न था यह परिवार । आज बीमारी ने इस परिवार को चौराहे पर ला खड़ा कर दिया i                     कैंसर जैसी बीमारी के चलते घर बार के साथ-साथ इनकी तीन गाड़िया भी बिक गई । आज यह औरत किराए के मकान पर रही है और मकान का किराया भी नहीं दिया जा रहा । अब एम्स अस्पताल के डॉक्टरों द्वारा इसे भी कैंसर बताया गया है इससे चलना भी मुश्किल हो रहा है । जिंदगी के यह उतार-चढ़ाव सब समय का खेल है । बच्ची का जन्मदिन न मना पाने के कारण बच्ची  अपने पापा को याद कर रो रही थी,और कह रही थी आप से तो पापा ही अच्छे  थे । मैंने नेत्रहीन कल्याणकारी संस्था में बात करके इस बच्ची के घर भेज उसका बर्थडे केक शाम के लिए बुक करवाया । मेरे से बच्ची की मां कई दिन से काम के लिए बोल रही थी ।मुझे कोई घर दिला दो बर्तन-पोछा भी कर लूगी ।  लेकिन मुझे पता है उसके शरीर हालात इस लायक नहीं है  मैंने एसडीएम से बात उसे ऑफिस में बैठने वाला काम मिल जाए जिसे वह आसानी से कर पाए

administrator, bbp_keymaster

Related Articles

Leave a Reply