विश्व-विकलांग दिवस पर चंडीगढ़ मुख्य-सचिवालय के सामने दिव्यांग-दृष्टिबाधितो का अपनी मांगों सहित आमरण-अनशन आज तीसरे दिन भी जारी, सरकार का अभी तक नकारात्मक रवैया ।

विश्व-विकलांग दिवस पर चंडीगढ़ मुख्य-सचिवालय के सामने दिव्यांग-दृष्टिबाधितो का अपनी मांगों सहित आमरण-अनशन आज तीसरे दिन भी जारी, सरकार का अभी तक नकारात्मक रवैया ।

संवाददाता अनीता गुलेरिया ।

मंगलवार तीन दिसंबर विश्व-विकलांग दिवस के दिन से पंजाब के चंडीगढ़ मुख्य-सचिवालय के सामने दृष्टिबाधित दिव्यांग-संरक्षण हेतु अपनी मांगों को पंजाब-सरकार के आगे रखते हुए आमरण-अनशन पर बैठे हैं । लेकिन आज तीसरा दिन होने के बावजूद पंजाब सरकार ने इन दिव्यांग दृष्टिबाधितो की तरफ कोई ध्यान ना देते उन्हें किसी भी तरह का कोई संतोषजनक उत्तर नहीं दिया है । तीन दिसंबर यानी कि विश्व-विकलांग दिवस वाले दिन सभी दिव्यांगजन इस दिन को बड़ी ही खुशी से अपने-अपने संस्थाओं में कई तरह के कार्यक्रम करते हैं,लेकिन पंजाब के यह दिव्यांग-दृष्टिबाधित इसी दिन से अपनी मांगों के साथ आमरण-अनशन करते हुए भूख हड़ताल पर बैठे हैं । मुख्य सचिवालय पंजाब चंडीगढ़ के सामने किए जा रहे इस अनशन में ब्लाइंड पर्सन एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्षअनिल वर्मा ने दिल्ली में मीडिया समक्ष बताते हुए कहा वह आज अपने दृष्टिबाधित साथियों की आर्थिक और हर तरह की मदद के लिए दिल्ली से काफी मात्रा में दृष्टिबाधितो सहित आज दिल्ली से चंडीगढ़ को रवाना हो रहे हैं । हमारी संस्था से हमारी संस्था के आनंद शाह और तरसेम सिंह जी आमरण अनशन एवं भूख हड़ताल पर बैठे हैं । ब्लाइंड-पर्सन एसोसिएशन (BPA) पंजाब शाखा के अध्यक्ष कुलदीप सिंह का कहना है की हमारी नेत्रहीनों के लिए कुछ मुख्य मांगे हैं, जब तक सरकार उन्हें पूरा नहीं करती, तब तक यह नेत्रहीन इसी तरह से इस अनशन में बैठे रहेंगे । हम दृष्टिबाधितो की कुछ मुख्य मांगे है जिसमे बेरोजगारी को दूर करते हुए लोकल बॉडी द्वारा निकाली गई 350 पोस्टों की भर्ती जल्द से जल्द की जाए ,एवं बाकी विभागों में बचे हुए बैकलॉग को पूरा किया जाए । एक मार्च को e.tt की 52 पोस्टों में नेत्रहीन e.tt के कैंडीडेट्स को चुनकर बाकी बची हुई पोस्टों को संगीत अध्यापक में बदला जाए, जैसा के 2016 में किया गया था । नेत्रहीनों को सात सौ पच्चास रुपये दी जाने वाली पेंशन को बढ़ाकर पांच हज़ार तक किया जाए, नेत्रहीन कर्मचारी जिनका प्रोबेशन-पीरियड होता है उन्हें इसके दौरान पूरी तनख्वाह मिलनी चाहिए. लुधियाना के जमालपुर में नेत्रहीनों का केवल एक ही सरकारी स्कूल है,उसमें अध्यापकों की एवं बाकी स्टाफ की जल्द भर्ती करना और इसी स्कूल में बंद पड़ी एक ब्रेल-प्रेस जिससे नेत्रहीन विद्यार्थी जो कि अलग-अलग स्कूलों में पढ़ते हैं, उनको किताबें उसी ब्रेल प्रेस से छाप कर दी जाती हैं लंबे समय से बंद पड़ी इस ब्रेल प्रेस को जल्दी से शुरू किया जाए । कुलदीप सिंह ने मीडिया समक्ष बताते हुए कहा हमने ब्लाइंड पर्सन एसोसिएशन की ओर से अपनी इन मांगों को लेकर 20 फरवरी, 16 मई, तीन अक्टूबर को चंडीगढ़ में विशाल रैलियों के चलते हमारी सरकार से कई बार बैठक दौरान बहुत ही सकारात्मक रवैया अपनाया गया, लेकिन उसे धरातल पर कतई नहीं उतारा गया, राष्ट्रीय अध्यक्ष अनिल वर्मा ने कहा यह संघर्ष ब्लाइंड पर्सन एसोसिएशन की ओर से शुरू हुआ है और मांगे ना माने जाने के आखिर तक निरंतर जारी रहेगा । तब से अभी तक सरकार का कोई भी नुमाइंदा ना तो वहां पहुंचा है और ना ही उनका कोई जवाब आया है,हमारी देश केसमस्त दिव्यांग-दृष्टिबाधित भाइयों से अपील है जितना ज्यादा हो सके इस आमरण अनशन पर बैठे साथियों का बढ़-चढ़कर सहयोग करते हुए सरकार को मजबूर किया जाए, कि हम दृष्टिबाधित भी इस देश का अभिन्न अंग है, और हम चाहते हैं समानता-अधिकार के तहत हमें भी राष्ट्रीय-कार्य में सम्पूर्ण-योगदान हेतु बनाया जाए,यदि हमें भी मौका मिले तो हम दृष्टिबाधित दिखा देंगे कि हम राष्ट्र के हर क्षेत्र के काम में किसी से भी पीछे नहीं हैं,शरीर में किसी एक अंग की कमी होने से कोई इंसान विकलांग नहीं हो जाता और विकलांगता कोई अभिशाप नहीं है, यह किसी भी इंसान में कभी भी, किसी भी पल आ सकती है और वैसे तो हमारे देश के प्रधानमंत्री का कहना है सबका साथ,सबका विकास तो हमारा यह सवाल है, हम दिव्यांगों का साथ,सरकार को बिल्कुल भी गवारा नहीं आखिर क्यों ? क्या हम इस देश के नागरिक नहीं हैं ? हमारा अपनी सरकार से यह पूछना है विकलांग से दिव्यांग नाम देकर हमें देश का एक अभिन्न अंग कहां गया,सिर्फ मात्र वोट बैंक के लिए क्या ? अभिन्न-अंग के बिना किसी भी देश का विकास मुमकिन ही नहीं नामुमकिन है । इसलिए हम चाहते हैं,सरकार तुरंत हमारी मांगों पर ध्यान देते हुए दिव्यांग दृष्टिबाधित-संरक्षण हेतु कोई ठोस से ठोस कदम उठाए, जिससे हम दिव्यांग अपने समाज में पंगु, बेचारा,असहाय, कमजोर ना रह कर एक स्वाभिमानी तौर पर अपना जीवन-यापन व्यतीत कर पाएं ।

 

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