योगी का रिपोर्ट कार्ड: सरकार हकीकत से दूर -10 दावों पर बोले EXPERTS

योगी का रिपोर्ट कार्ड: सरकार हकीकत से दूर -10 दावों पर बोले EXPERTS

योगी का रिपोर्ट कार्ड: सरकार हकीकत से दूर -10 दावों पर बोले EXPERTSयोगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को अपनी सरकार के 100 दिन का रिपोर्ट कार्ड पेश किया। योगी आदित्यानाथ ने बिजली-सड़क जैसी मूलभूत जरूरतों पर सरकार के कामों का हवाला दिया।

लखनऊ.योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को सरकार के 100 दिन का रिपोर्ट कार्ड पेश किया। 48 पन्नों के इस रिपोर्ट कार्ड को योगी ने ‘100 दिन विश्वास के’ नाम दिया है। योगी ने कहा कि सरकार को अपनी उपलब्धियों पर संतोष है। उन्होंने सड़क, बिजली और खेती और दूसरे कामों का हवाला दिया। योगी सरकार 100 दिन में सब ठीक रहने का दावा कर रही है। उधर, जब हमने  इस रिपोर्ट कार्ड के 10 मुद्दों पर EXPERTS से बात की तो उन्होंने कहा- सरकार हकीकत से कोसों दूर है। रिपोर्ट कार्ड पर EXPERT VIEW…
यूपी सरकार के रिपोर्ट कार्ड पर पॉलिटिकल एक्सपर्ट्स रतनमणि लाल, हेमंत तिवारी, एक्स आईएएस एसपी सिंह, रिटायर्ड डीजी हेल्थ एडमिनिस्ट्रेशन डॉ. आर बी सिंह, श्रीधर अग्निहोत्री से बात कर राय जानी।
1) कानून-व्यवस्था
– “योगी सरकार ने सत्ता संभालते ही कानून एवं व्यवस्था पर जीरो टॉलरेंस की नीति पर अमल करने का दावा किया था, लेकिन सिर्फ अप्रैल और मई महीने में ही 2016 अप्रैल-मई महीने की तुलना में क्राइम 195% बढ़ गया है। रिपोर्ट कार्ड में नहीं बताया कि कितना क्राइम कम हुआ। आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल और मई में ही हत्या 240, रेप 179, डकैती 20 और लूट की 273 घटनाएं हुई हैं।”
– “एसटीएफ की पेट्रोल पम्प पर कार्रवाई का जिक्र है। सच यह है कि हाईकोर्ट की सख्ती के बाद अब सभी पेट्रोल पम्प की जांच के आदेश हुए। कानून-व्यवस्था ऐसा मुद्दा है, जिसे 100 दिन में ठीक किया जा सकता था… ऐसा तब होता, जब आपके मनपसंद अफसर कुर्सी पर बैठे हों।”
2) हेल्थ एंड डेवलपमेंट
– “योगी सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार करने का दावा किया। डॉक्टर्स की रिटायमेंट एज 60 साल से बढ़ाकर 62 साल कर दी गई। कहा गया कि इससे 14500 डॉक्टर्स को फायदा मिलेगा। इसके बावजूद यूपी में अभी भी 3682 डॉक्टर्स की कमी है। हेल्थ डिपार्टमेंट में मौजूदा डॉक्टरों की 18,182 पोस्ट हैं, इसमें 7327 पोस्ट खाली हैं। 2014 से 2017 तक 1100 डॉक्टर्स रिटायर हो रहे हैं। खाली पोस्ट भरने की कोशिश नहीं की गई।”
3) गांव और शहर की कनेक्टिविटी
– “यूपी में लगभग 53 करोड़ यात्री बस से सफर करते हैं। परिवहन निगम के पास 12,500 बसें हैं। जिसमें से 9000 निगम की और 3500 बसें अनुबंधित हैं। अनुबंधित बसों की वजह से निगम को करोड़ों का नुकसान होता है। सरकार ने अभी 3725 बसें गांव के लिए चलाईं। रूट और बढ़ाने की जरूरत है।”
4) स्मार्ट सिटी
– “स्मार्ट सिटी के तहत चुने गए शहरों को रिपोर्ट कार्ड में उपलब्धि के तौर पर बताया गया। स्मार्ट सिटी केंद्र की योजना है। पहले ही 4 शहर लखनऊ, वाराणसी, कानपूर और आगरा चुने जा चुके हैं। अभी हाल ही में इलाहबाद, अलीगढ़ और झांसी को चुना गया। यूपी सरकार ने इन शहरों में स्मार्ट सिटी का काम दिसंबर 2017 तक पूरा करने का वादा किया है। राजधानी लखनऊ की बात करें तो सिक्युरिटी सबसे बड़ा मसला है और सबके लिए मकान बड़ी समस्या है।”
5) कर्ज माफी
– “सरकार 100 दिन में किसानों के लिए कर्ज माफी का सिर्फ एलान ही कर पाई है। इससे 86 लाख लघु और सीमान्त किसानों का 1 लाख तक का फसली ऋण माफ किया जाएगा। 36 हजार करोड़ रुपए का भार सरकार के ऊपर आएगा। अभी सरकार योजना को लागू करने का फॉर्मूला ढूंढ रही है। सरकार ने पहले ही एलान किया है कि बजट सत्र के बाद किसानों को अनुदान पत्र दिया जाएगा। कर्ज माफी को बेहतर पहल के रूप में देखना चाहिए।”
6) इन्फ्रास्ट्रक्चर
– “योगी सरकार 15 जून तक यूपी की सभी सड़कों को गड्ढा मुक्त नहीं कर पाई। 15 जून तक सड़कों का 63% काम ही हो पाया। 9 डिपार्टमेंट्स को 1,21,034 किमी सड़कों को सुधारना था, लेकिन 15 जून तक 71 हजार 440.71 किमी सड़क को ही गड्ढा मुक्त किया जा सका। सिंचाई विभाग के अंडर आने वाली सड़कों पर कोई भी काम नहीं हुआ था।”
7) गांवों में बिजली
– योगी ने दावा किया 14 अप्रैल 2017 को पॉवर फॉर ऑल के एलान के साथ बिजली सप्लाई ठीक हो गई है। 14 अप्रैल से ग्रामीण इलाकों में 18 घंटे तहसील और बुंदेलखंड को 20 घंटे और सभी जिला मुख्यालयों को 24 घंटे बिजली सप्लाई का फैसला लिया गया। सच ये है कि लखनऊ में ही कई इलाकों में बिजली की रोजाना 1-2 घंटे कटौती जारी है। अफसर ही सरकार को सही फीडबैक नहीं दे पा रहे हैं।”
8) खनन नीति
– योगी सरकार से पहले बालू और मोरंग 40 से 50 रुपए फुट मिलता था, लेकिन अब यही बालू और मोरंग 100 से 150 रुपए फुट मिल रहा है। नई खनन नीति हाल ही में लागू हुई है, ऐसे में इसका असर भी कुछ दिनों बाद ही देखने को मिलेगा। ई-टेंडरिंग की शुरुआत की गई है। यह एक अच्छी पहल मानी जा सकती है, लेकिन इसको भी ठीक ढंग से लागू करने के लिए अफसरशाही पर नकेल कसनी होगी।”
9) एजुकेशन
– “सरकार ने प्राइवेट स्कूलों की फीस कम करने का दावा किया था, लेकिन 100 दिन में सरकार सिर्फ एक कमेटी ही बना पाई। जिसकी रिपोर्ट अभी तक नहीं आई है। डिप्टी सीएम दिनेश शर्मा का कहना है कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के ऑर्डर के मद्देनजर विधायी परीक्षण कराया जा रहा है। जब तक सरकार इस मामले में कोई फैसला लेगी, तब तक आधा सेशन बीच चुका होगा। इस सेशन में फीस कम होना मुश्किल लग रहा है।”
10) रोजगार
– “हाल ही में सैमसंग के साथ एमओयू हुआ, इसकी शुरुआत अखिलेश सरकार में ही हुई थी। रोजगार के मौके कैसे बनेंगे, इसका जवाब सरकार नहीं दे पाई है। नई औद्योगिक नीति हर नई सरकार के साथ बनती है, लेकिन 100 दिन में उसका फायदा नहीं दिखेगा… यह भी सच है।”
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