देश की दो तिहाई आबादी को राहत, नहीं बढ़ेंगे रियायती अनाज के दाम

देश की दो तिहाई आबादी को राहत, नहीं बढ़ेंगे रियायती अनाज के दाम
देश की दो तिहाई आबादी को राशन की दुकानों से अति रियायती दरों पर ही अनाज की आपूर्ति पूर्ववत होती रहेगी

नई दिल्ली । देश की दो तिहाई आबादी को राशन की दुकानों से अति रियायती दरों पर ही अनाज की आपूर्ति पूर्ववत होती रहेगी। इनके मूल्य में कोई फेरबदल नहीं किया जाएगा। इसे सालभर के लिए और बढ़ा दिया गया है। जबकि इस कानून के तहत प्रत्येक तीन साल बाद राशन के अनाज के दामों को संशोधित किया जा सकता है।
राष्ट्रीय (एनएफएसए) वर्ष 2013 में अस्तित्व में आ गया था। कानून में यह प्रावधान अनाज की पैदावार की लागत में होने वाली वृद्धि को देखते हुए किया गया। तीन साल बाद यानी पिछले साल 2016 में ही अनाज के मूल्य में संशोधन हो जाने चाहिए थे। लेकिन मूल्य संशोधित नहीं किये गये। सरकार को 30 जून तक इस पर फिर फैसला करना था। लेकिन उसने वृद्धि फिर टाल दी। इससे 30 जून 2018 तक राशन के अनाज के मूल्य नहीं बढ़ेंगे।
राशन दुकानों से फिलहाल देश के 81 करोड़ से अधिक आबादी को रियायती अनाज मुहैया कराने का प्रावधान है। इसके तहत प्रत्येक व्यक्ति को हर महीने पांच किलो अनाज देने का प्रावधान है। इसमें मोटे अनाज की आपूर्ति एक रुपये प्रति किलो की दर पर की जाती है, जबकि गेहूं की आपूर्ति दो रुपये किलो और चावल की आपूर्ति तीन रुपये में की जाती है। इस मूल्य के वास्तविक निर्धारण के लिए ही संशोधन का प्रावधान किया गया है।

फिलहाल वास्तविक मूल्य और रियायती दर में भारी अंतर है। इसके चलते केंद्र के खजाने पर भारी बोझ पड़ रहा है। मंत्रलय के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक रियायती दरों में मात्र एक रुपये प्रति किलो की वृद्धि करने पर 5000 करोड़ रुपये की कम सब्सिडी देनी पड़ेगी। जबकि गेहूं, धान और मोटे अनाज के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में होने वाली वृद्धि से खाद्य सब्सिडी का गुब्बारा लगातार फूलता जा रहा है।

भारतीय खाद्य निगम ही अनाज की सरकारी खरीद और राशन दुकानों पर वितरण के लिए अनाज की सप्लाई करता है। वर्तमान में एक किलो गेहूं पर 21.09 रुपये और चावल पर 29.64 रुपये किलो की सब्सिडी दी जा रही है। राष्ट्रीय के तहत राशन दुकानों के लिए सालाना पांच करोड़ टन से अधिक अनाज (गेहूं व चावल) की आपूर्ति की जाती है।

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