गुरूग्राम से प्रतिष्ठित-कवि व लेखनकार रामकृष्ण रस्तोगी

गुरूग्राम से प्रतिष्ठित-कवि व लेखनकार रामकृष्ण रस्तोगी

मैं अभी आजाद नहीं

(1). 72 वर्ष हो गए आजादी के,पर मैं अभी आजाद नहीं ।
दर-दर ठोकरें खाती हूं,पर कहीं से मैं आबाद नहीं ।।
(2). बचपन में पिता,जवानी में पति,बुढ़ापे में पुत्र-अधीन रही ।
कैसा बीता मेंरा ये जीवन,क्या यहा किसी को मालूम नहीं ।।
(3). बाहर निकल कर नहीं सुरक्षित, घर में भी मैं सुरक्षित नहीं ।
कैसा है मेरा असुरक्षित-जीवन, क्या इस जगत को पता नहीं ।।
(4). करती हूं जीवन भर सब की सेवा,फिर भी मिलता मुझे विश्राम नहीं ।
कैसी है यह देश की आजादी, क्यो कोई भी,बतलाता मुझे अब नहीं ।।
(5).कहते हैं नारी देवी स्वरूप, इसको कोई समझता नहीं ।सबको यहा जन्म देने पर भी, मेरे जीवन का अस्तित्व नहीं ।।
(6). इस अपमानित जीवन से, अभी सम्पूर्ण-आजादी मुझको मिली नहीं ।
कैसे कह दूं,स्वतंत्रता-दिवस है, इस धरा पर,जब तक मैं स्वतंत्र नहीं ।।

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