एम्स मे इंडियन-एकेडमी न्यूरोसाइंस 37वे वार्षिक सम्मेलन मस्तिष्क-विज्ञान पर छात्रों और डॉक्टरों द्वारा विभिन्न-पहलुओं पर हुई चर्चा ।

एम्स मे इंडियन-एकेडमी न्यूरोसाइंस 37वे वार्षिक सम्मेलन मस्तिष्क-विज्ञान पर छात्रों और डॉक्टरों द्वारा विभिन्न-पहलुओं पर हुई चर्चा ।

अनीता गुलेरिया ।
दिल्ली एम्स-अस्पताल एन्टोनी फिजियोलॉजी,न्यूरोसाइंस ऑर्गेनाइजेशन के 37 वे वार्षिक-सम्मेलन संयोजन में वैज्ञानिक-विशेषज्ञ,डॉक्टरों द्वारा दिल्ली के नौ स्कूल जिसमे एयरपोर्ट सुब्रतो-पार्क स्कूल सेंट-थॉमस इत्यादि पांच सौ की तादाद में आए छात्रों को मानसिक-तनाव कृत्रिम-बुद्धि शारीरिक-व्यायाम ई एमओ के बारे में और समस्त-मस्तिष्क विज्ञान,संगीत-शारीरिक व्यायाम,स्मार्टफोन-रेडिशयन के बारे में जागृत करते हुए वार्तालाप में छात्रों और डॉक्टरों द्वारा विभिन्न-पहलुओं पर कई प्रकार की चर्चा हुई । मीडिया समक्ष बताते हुए IAN फिजियोलॉजी-चेयरपर्सन डाक्टर के.के दीपक ने कहा न्यूरोसाइंस-ऑर्गेनाइजेशन मे हर सीजन की तरह सम्मेलन द्वारा नव युवा पीढ़ी-कांफ्रेंस के जरिए दिमाग-संबंधित महत्व जानकारी स्कूली-छात्रों को दी गई । डॉक्टर दीपक अनुसार न्यूरो-टू-विहेवियर का विषय, यहां अंतनिर्हित तंत्रिका-तंत्र में व्यवहार के लिए हितकारी नहीं है,इस पर विचार-विमर्श किया जाएगा,उन्होने नवोदित-शोधों पर कहा दर्द-आंकलन करने के बहुत सारे तरीके भी शामिल हैं चौदह-वैज्ञानिक संगोष्ठी पर छह निजी-व्याख्यान किए गए, जिनमें प्रमुख तौर पर प्रख्यात वैज्ञानिक-जैविक पहलू पर विचार-विमर्श किया गया,इस विषय पर तंत्रिका-वैज्ञानिकों द्वारा पारित-चुनौतियों पर चर्चा भी की गई । इस तरह नवंबर के वार्षिक-सम्मेलन संयोजन में उपस्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान न्यूरो-विशेषज्ञ और डाक्टरों की टीम के इलावा स्कूली छात्रों के बीच वार्तालाप में न्यूरोसाइंस रिसर्च के प्रति जागरूकता के चलते यह मीटिंग न्यूरोमकैनिज्म को आगे बढ़ाने के लिए पूरी तरह से संतोषजनक व पूरी तरह से कामयाब रही ।

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